[2021] बैसाखी पर निबंध: Baisakhi Essay in Hindi

हमारे देश में हर त्योहार का नाता ॠतुओ , फसलो, और महापुरुषो के जीवन से जुड़ी घटनाओ से होता है। बैसाखी त्योहार का संबंध बैसाख माह से है , इस त्यौहार को बैसाख महीने की पहली तारीख को बड़ी खुशी से मनाया जाता है। ये बसंत ऋतु का त्योहार है। इस समय प्रकृति चारो तरफ से सजी हुई होती हैं। वैसाखी हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। 2022 में बैसाखी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी।

वैसाखी पर निबंध Baisakhi Essay in Hindi
Baisakhi Essay in Hindi

बैसाखी पर निबंध – Essay on Vaisakhi in Hindi

पंजाब में इस त्योहार को पुराने समय से बड़ी खुशी और आस्था के साथ मानते है। बैसाखी कृषि पर्व और धार्मिक पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इसे किसानो का त्योहार भी कहा जाता हैं। इस त्योहार को सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाओ को याद करके भी मनाया जाता हैं। बैसाखी त्यौहार को पुराने समय से विशेषकर पंजाब राज्य मे मनाया जाता हैं।

बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना

बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। सिख धर्म के लोग किसी काम की शुरुआत करने के लिए इस दिन को अच्छा मानते है। सिखो के आखिरी और दसवे गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने सन् 1699 में खालसा पंथ की स्थापना बैसाखी के पावन दिन पर ही की थी। उन दिनों मुगल बादशाह औरंगजेब ज़बरदस्ती लोगो को अपना धर्म बदलने को कहता था और उन पर अत्याचार करता था।

सिख गुरु इस तरह के जबरदस्ती धर्म परिवर्तन का विरोध करते थे।उनको औरंगजेब द्वारा किये जाने वाले अत्याचार का सामना करने के लिए बहुत बार युद्ध करना पड़ गया। उन्होंने भावी संगठन को मजबूत और अजय बनाने के लिए खालसा पंथ को स्थापित किया। इसलिए इस दिन को खालसा दिवस भी कहा जाता है। इसीलिए सिखो के लिए ये दिन एक धार्मिक महत्व का भी दिन है।

बैसाखी का ऐतिहासिक महत्व – शहीद दिवस

भारत में इस दिन को शहीद दिवस भी कहा जाता है। और बड़ी ही आस्था से याद किया जाता है। सन् 1919 में जब अंग्रेजो के द्वारा लगाई गई रोलेट एक्ट का विरोध सारे देश मे हो रहा था, पंजाब मे पंजाबवासीयो ने 13 अप्रैल, 1919 को विशाल सभा का आयोजन किया। हजारो लोग, औरत, आदमी, बच्चे बूढ़े सब बैसाखी के पावन अवसर पर अमृतसर के जलियावाला बाग़ में मौजूद थे। इस बाग के मुख्य दरवाजे पर जरनल डायर ने कब्जा करके बिना किसी चेतावनी दिये सब पर गोली बरसाना शुरू कर दिया।

जलियावाला बाग में हुए इस नरसंहार मे लगभग 400 लोग मारे गए और 1000 लोग घायल हुए। शहीदों की याद मे जलियावाला बाग में लाल पत्थर का एक सुंदर स्मारक बनवाया गया । इसलिए बैसाखी के पावन अवसर पर यहाँ शहीद दिवस मनाया जाता हैं। यह दिन भारत में बडी आस्था से याद किया जाता है।

पंजाब में बैसाखी कैसे मनाया जाता है

बैसाखी का यह त्योहार पंजाब में एक खास महत्व रखता है लोग जगह जगह पर लोक नृत्य का आयोजन करते है। पंजाब का भांगड़ा नृत्य विशेष तोर पर प्रसिध् है इस नृत्य में उचा उछलना, कूदना फांदना, एक दूसरे को कंधे पर उठा कर नाचना भंगडा की प्रमुख कलाएँ है।

पंजाब में लोग रंग बिरंगी पगड़ी, रंगीन रेशमी कसीदा की हुई जैकेट पहन कर इस नृत्य में भाग लेते है। यह एक खुशी का त्योहार है इस दिन नाचने और गाने के साथ साथ खुशी भी जताई जाती हैं । और वही जलियावाला बाग में यह त्योहार श्रधांजलि देकर शहीद दिवस के रूप मे मनाया जाता हैं। इस प्रकार बैसाखी को अलग अलग रूप से अलग अलग राज्यों में बड़े ही हर्षोउल्लास से मनाया जाता है।

पहाड़ी क्षेत्र में वैसाखी

पंजाब के अलावा बैसाखी का त्योहार पहाडी इलाको में भी बडे उत्साह से मनाया जाता है। कुमायु, गढ़वाल और हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में इस त्योहार का विशेष महत्व है पहाड़ी लोग इस दिन को मकर संक्रान्ति के रूप मे मानते है।

पहाड़ी क्षेत्रों में इस दिन कुछ जगह पर बडे बड़े मेले लगाए जाते है ये मेले अधिकतर भगवती दुर्गा के मंदिर पर लगते है। पहाड़ी क्षेत्रों में देवी पूजा का बड़ा महत्व होता है। इस दिन लोग मंदिरो मे जाकर बड़ी ही आस्था से दुर्गा माता की पूजा करते है , दुर्गा मां का पाठ भी करते है।

इन इलाको मे मेलो के देखने का अपना ही मजा है इस प्रकार पहाड़ी क्षेत्रों में यह त्योहार दो प्रकार से मनाया जाता है एक मकर संक्रान्ति और दूसरा देवी के मंदिरों पर मेले के रूप में।

बैसाखी पर्व का धार्मिक महत्व

भारत में बैसाखी त्यौहार का धार्मिक महत्व बहुत है । पंजाब और देश के अन्य सभी गुरुदवारो में इस ख़ास उत्सव का प्रबंध किया जाता है है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में पंथ की और से जुलूस व सभाओ का आयोजन भी किया जाता है। हर श्रद्धालु व्यक्ति गुरुद्वारे मे हो रहे आयोजन मे आस्था पूर्वक शामिल होता हैं और गुरुद्वारे मे माथा टेक कर लंगर आदि में हिस्सा लेता है।

बैसाखी पर लोग नदियों, सरोवरो आदि मे स्नान करते है बड़ी संख्या मे लोग गंगा, परयागराज जैसी नदियों मे जाकर स्नान करते है बड़ी बड़ी धार्मिक संस्थाएँ सत्संग समारोह का आयोजन करती हैं जिसमे धर्म और आध्यात्मक जैसे विषयों पर प्रवचन दिये जाते है।

उपसंहार

बैसाखी त्योहार पंजाब और पंजाबियों का एक बहुत ही महान त्योहार है लैकिन यह हमारी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक व जन जीवन मे जागृति का प्रेरक है। बैसाखी के त्योहार से हमे एक ओर जलियावाला बाग के शहीदों की याद दिलाकर हमारे अंदर देश के प्रति राष्ट् चेतना जागृत करता है, दूसरी ओर गुरु गोबिंद सिंह जी का निर्भय संगठन का संदेश राष्ट्र एकता को मजबूत करता है।आज यह त्योहार केवल पंजाब और पंजाबियों का ही नही बल्कि पूरे देश का त्योहार बन गया है। हमें इस त्योहार को देश की एकता के रूप मे बड़ी श्रधा और खुशी से मनाना चाहिए।

10 lines on Baisakhi : बैसाखी पर दस लाइन

  1. बैसाखी का त्योहार सिखो द्वारा मनाया जाने वाला पंजाब का एक महान त्योहार है।
  2. यह एक ऋतु पर्व है, इसको कृषि पर्व, ऐतिहासिक, सामाजिक व धार्मिक रूप मे भी मनाया जाता है।
  3. यह त्योहार धार्मिक चेतना और राष्ट्रीय जागरण का स्मृति दिवस है।
  4. इस दिन सिख के गुरु गोबिंद सिंह जी के द्वारा सन 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की गई थी।
  5. बैसाखी के पुण्य अवसर पर जलियावाला बाग़ मे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  6. इस दिन पंजाबी लोग लोक गीतों, और भंगडा आदि का आयोजन करते है।
  7. इस त्योहार को पर्वतीय क्षेत्र के लोग मकर संक्रान्ति के रूप में मनाते है।
  8. बैसाखी के दिन 13 अप्रैल सन् 1919 में जलियावाला बाग मे जर्नल डायर द्वारा गोली चलाये जाने पर लगभग 400 व्यक्ति मारे गए और कम से कम 1000 लोग घायल हुए थे।
  9. इस दिन गुरुद्वारो को खूब सजाया जाता है और लंगर आदि का प्रबंध किया जाता है।
  10. यह पर्व सब के लिए हर्ष और उत्साह का त्योहार है। बैसाखी का पावन पर्व हमारे अंदर राष्ट्रीय चेतना को जागृत करके एकता को सुदृढ करता है।

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